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19 दिसंबर 2025: संसद से सड़क तक उथल-पुथल, सुरक्षा अलर्ट से कूटनीति तक – देश-दुनिया के अहम घटनाक्रम

नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। बीते गुरुवार को देश और दुनिया में राजनीति, सुरक्षा, न्यायपालिका, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आम जनजीवन से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। संसद में जहां अहम विधेयकों के पारित होने से सियासी बहस तेज हुई, वहीं सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से एक बड़ी रेल साजिश नाकाम हुई। सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की भयावह स्थिति, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को मिला सम्मान और दुर्घटनाओं में गई निर्दोष जिंदगियों ने इस दिन को खास बना दिया।

संसद और राजनीति: विधेयक पास, विरोध और पलटवार

लोकसभा में ‘शांति विधेयक 2025’ पारित होने के साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के निवेश और संचालन का रास्ता साफ हो गया। सरकार ने इसे ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष ने सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल उठाए।
इसी दिन मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार एवं आय वृद्धि (VB-G RAM G)’ करने वाला विधेयक हंगामे के बीच पास हुआ। विपक्ष ने महात्मा गांधी का नाम हटाने का विरोध करते हुए कागज फाड़े और सदन से वॉकआउट किया।
बिहार में हिजाब को लेकर जारी विवाद पर भाजपा ने साफ किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार माफी नहीं मांगेंगे। उधर, केंद्र द्वारा योजनाओं के नाम बदले जाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में रोजगार गारंटी योजना का नाम गांधी के सम्मान में रखने की घोषणा कर सियासी पलटवार किया।

सुरक्षा और न्यायपालिका: सतर्कता और सख्ती

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में तेजस एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश रेलवे की सतर्कता से नाकाम हुई। ट्रैक पर सीमेंटेड स्लीपर मिलने के बाद ट्रेन 27 मिनट रोकी गई। यात्रियों में दहशत थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।
दिल्ली ब्लास्ट मामले में NIA ने नौवें आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसे जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जजों के रिटायरमेंट से पहले ताबड़तोड़ फैसले सुनाने की प्रवृत्ति पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “ऐसा लगता है जैसे लास्ट ओवर में छक्के मारे जा रहे हों,” और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आम लोगों के लिए राहत की खबर यह रही कि दिल्ली में अब ट्रैफिक चालान का भुगतान UPI से तुरंत किया जा सकेगा, जिससे अदालतों के चक्कर कम होंगे।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य: सम्मान और तनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओमान के सुल्तान ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से सम्मानित किया, जिसे भारत-ओमान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बांग्लादेश में विद्रोही नेता हादी की सिंगापुर में मौत के बाद ढाका में हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी हुई। भारतीय उच्चायुक्त को निकालने की मांग से कूटनीतिक तनाव बढ़ा।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हुई गोलीबारी की ‘इस्लामिक स्टेट’ द्वारा तारीफ किए जाने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं, हालांकि संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली।
एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में पाकिस्तान के एक विश्वविद्यालय में गीता, महाभारत और संस्कृत की पढ़ाई शुरू हुई, जिसे सांस्कृतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट

इंडिगो एयरलाइंस के CEO ने कहा कि 5000 उड़ानों के रद्द होने का संकट अब पीछे छूट चुका है और 2200 उड़ानों के साथ संचालन स्थिर हो गया है।
अडानी समूह दक्षिण अफ्रीका की 26 अरब डॉलर की बिजली परियोजना और भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों के बीच वैश्विक चर्चा में रहा।

पर्यावरण, स्वास्थ्य और आम जनजीवन

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचने के बीच एक सपा सांसद के ‘होलिका दहन और अंतिम संस्कार’ वाले बयान ने विवाद खड़ा किया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण में सरकारी उपायों को “पूरी तरह नाकाम” बताया।
इसी बीच, योग को प्रदूषण से लड़ने के उपाय के रूप में प्रचारित किया गया, हालांकि विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक नीतियों की जरूरत पर जोर दिया।

हादसे और मानवीय पीड़ा

हिसार में चार्जिंग के दौरान ई-स्कूटी की बैटरी फटने से एक व्यक्ति की मौत और परिवार के तीन लोग झुलस गए।
नैनीताल के पास कैंची धाम जा रहे यूपी के एक परिवार की स्कॉर्पियो खाई में गिरने से तीन महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई।
राजस्थान और यूपी में भीषण ठंड और कोहरा छाया रहा, जबकि हेमकुंड साहिब में तापमान माइनस 20 डिग्री तक गिर गया, जिससे जनजीवन ठप हो गया।
क्रिकेट प्रेमियों के लिए निराशा की खबर यह रही कि लखनऊ में कोहरे के कारण भारत-दक्षिण अफ्रीका टी-20 मैच रद्द करना पड़ा। राहत की बात यह कि गेहूं बेचकर टिकट खरीदने वाले प्रशंसकों के पैसे BCCI लौटाएगा।

कल का दिन भारत के लिए विरोधाभासों से भरा रहा – एक ओर संसद में बड़े फैसले और अंतरराष्ट्रीय सम्मान, दूसरी ओर प्रदूषण, हादसे और आम लोगों की पीड़ा। इन घटनाओं ने साफ किया कि नीति और सत्ता के फैसलों का असर अंततः आम नागरिक की सुरक्षा, सेहत और जीवन पर ही पड़ता है। आने वाले दिनों में इन्हीं सवालों के जवाब तय करेंगे कि विकास और संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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