प्रदूषण और मजदूरों के शोषण के आरोपों से घिरी वेस्टर्न कोक प्रोडक्ट्स; जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
कोरबा (पब्लिक फोरम)। औद्योगिक नगरी कोरबा का ग्राम गोढ़ी इन दिनों प्रदूषण के काले धुएं और मजदूरों के आंसुओं के बीच न्याय की बाट जोह रहा है। यहां संचालित ‘वेस्टर्न कोक प्रोडक्ट्स’ (कार्बन फैक्ट्री) पर न केवल पर्यावरण को जहरीला बनाने का आरोप है, बल्कि वहां काम करने वाले गरीब आदिवासियों के शोषण और सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही की भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने अब ‘आर-पार’ की लड़ाई का मन बना लिया है। पार्टी ने जिला प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर फैक्ट्री में ताला जड़ देंगे।
मासूम के भविष्य से खिलवाड़: 17 साल के संतोष की दर्दनाक दास्तां
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील और हृदय विदारक पहलू 17 वर्षीय आदिवासी युवक संतोष कुमार कोरवा की कहानी है। ग्राम कदमझरिया निवासी संतोष, अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 2022-23 में फैक्ट्री प्रबंधन ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण के इस नाबालिग से जोखिम भरा काम करवाया।
नतीजा यह हुआ कि कार्बन प्लास्टिक मशीन की चपेट में आने से संतोष का दायां हाथ कट गया। एक पल में एक हंसते-खेलते युवा का भविष्य अंधेरे में डूब गया और परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने इस घटना के बाद पीड़ित को उचित मुआवजा और सहारा देने के बजाय संवेदनहीनता का परिचय दिया।
जहरीली हवा और बीमार होता गांव
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे ने बताया कि फैक्ट्री संचालकों, सुभाष अग्रवाल और अंकुश अग्रवाल की यह इकाई पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। फैक्ट्री से निकलने वाला काला धुआं और रासायनिक अपशिष्ट (वेस्ट) गांव की हवा में जहर घोल रहा है।
इसके दुष्परिणाम अब साफ दिखने लगे हैं:-
🔹ग्रामीणों में सांस और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
🔹उपजाऊ खेती की जमीन बंजर हो रही है।
🔹नदी-नालों का पानी दूषित हो चुका है, जिससे मवेशियों और जंगल के जीव-जंतुओं पर खतरा मंडरा रहा है।
रोजगार के नाम पर शोषण और अपमान
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में फैक्ट्री के भीतर चल रहे ‘अमानवीय व्यवहार’ का भी जिक्र किया गया है। पार्टी का आरोप है कि स्थानीय बेरोजगार युवकों को रोजगार का सपना दिखाकर बुलाया जाता है, लेकिन अंदर उनके साथ बंधुआ मजदूरों जैसा सुलूक होता है।
श्रमिकों को जातिसूचक गालियां दी जाती हैं, मारपीट की जाती है और तय मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता। मनमाने ढंग से नौकरी से निकाल देना यहां आम बात हो गई है। यह केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का हनन है।
प्रशासन को सीधी चुनौती: “कार्रवाई करो या ताला लगेगा”
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व में कई शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी जांच नहीं हुई है। पार्टी ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि:-
🔹प्रदूषण नियंत्रण और श्रम कानूनों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच हो।
🔹पीड़ित संतोष कुमार कोरवा को न्याय और उचित मुआवजा मिले।
🔹जनहित में इस फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर प्रशासन नहीं जागा, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से उग्र प्रदर्शन करेंगे और फैक्ट्री में ताला जड़ देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ग्राम गोढ़ी का यह मामला महज एक फैक्ट्री के विरोध का नहीं, बल्कि ‘विकास’ की कीमत चुका रहे उन बेजुबान लोगों का है जिनकी सुनने वाला कोई नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन संतोष जैसे पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए आगे आता है, या फिर प्रदूषण और शोषण का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।





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