कांकेर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय कर्मचारी यूनियन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ गंभीर आपत्ति जताते हुए अक्टूबर माह में जारी नई कलेक्टर मजदूरी दर में महंगाई भत्ता न बढ़ाए जाने का मुद्दा उठाया है। यूनियन ने तत्काल महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग करते हुए मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपने संघर्ष को तेज करने का फैसला लिया है।
यूनियन के राज्य अध्यक्ष द्वारका कोसरिया और महासचिव भाव सिंह कश्यप ने आज जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि हर छह महीने के अंतराल पर कलेक्टर द्वारा 33 नियोजकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित की जाती है, जिसमें नगरीय निकाय के प्लेसमेंट कर्मचारी भी शामिल हैं। इस मजदूरी दर में वेतन और परिवर्तनशील महंगाई भत्ता दोनों शामिल होते हैं। लेकिन इस बार अक्टूबर माह में शासन ने जो न्यूनतम मजदूरी तय की है, उसमें न तो वेतन में बढ़ोतरी की गई और न ही महंगाई भत्ते में, जो मजदूरों के साथ स्पष्ट अन्याय है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन श्रम विभाग ने श्रमिकों के वेतन और महंगाई भत्ते में पूर्ववर्ती दर से कोई परिवर्तन नहीं किया। इससे श्रमिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। जब आम जनता महंगाई से परेशान है, तब सरकार का यह कदम पूरी तरह से श्रमिक विरोधी है। उन्होंने कहा कि शासन के इस निर्णय से श्रमिकों में व्यापक आक्रोश है।
आज छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया गया कि श्रमिकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ संगठन की गतिविधियों को तेज किया जाएगा। बैठक में यूनियन की सदस्यता के विस्तार पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में यूनियन द्वारा पिछले दिनों चलाए गए अभियानों की समीक्षा करते हुए यह पाया गया कि पूरे प्रदेश में केवल कांकेर नगर पालिका में ही प्लेसमेंट कर्मचारियों को पहली बार ईएसआई कार्ड मिला है। यूनियन नेताओं ने इसे संगठन के सामूहिक संघर्ष का परिणाम बताया।
आज की बैठक में यूनियन के दिलीप साहू, अरुण बाल्मीकि, भाव सिंह कश्यप, अशोक नेताम, राकेश बिछिया, प्रशांत रजक, राज रजक और किशुन साहू उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष द्वारका कोसरिया ने की।





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