शनिवार, नवम्बर 29, 2025
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छत्तीसगढ़ में बढ़ी जमीन गाइडलाइन दरों पर कांग्रेस का तीखा विरोध: कहा- निर्णय आम जनता और रियल एस्टेट सेक्टर पर सीधा हमला

कोरबा (पब्लिक फोरम)। जमीनों की गाइडलाइन दरों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी को लेकर जिला कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। नव नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान और पूर्व जिला अध्यक्ष नत्थूलाल यादव ने संयुक्त प्रेस नोट जारी कर निर्णय को “अदूरदर्शी, जनविरोधी और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला” बताया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गाइडलाइन दर बढ़ने से आम नागरिक की आर्थिक 부담 बढ़ेगा। मकान, दुकान और उद्योग लगाने की लागत में भारी वृद्धि होगी। इससे भूमि की खरीदी-बिक्री प्रभावित होगी, निर्माण कार्य मंद पड़ेगा और बेरोजगारी में इजाफा होगा।

“एक साल में 130 से 500 प्रतिशत की वृद्धि, प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ” – मुकेश राठौर

जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में गाइडलाइन दरों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी एक बार में नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि मुंबई, दिल्ली, पुणे और हैदराबाद जैसे महानगरों में भी गाइडलाइन दरों को 10–15% की सीमित सीमा में ही बढ़ाया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार का यह कदम विकास को बाधित करेगा और निर्माण तथा औद्योगिक गतिविधियों को धीमा कर देगा।

कांग्रेस सरकार की 30% छूट खत्म, अब दामों में 40–130% तक उछाल – मनोज चौहान

ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने जमीन रजिस्ट्री पर 30 प्रतिशत की छूट देकर रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत दी थी।
लेकिन वर्तमान सरकार ने पहले यह छूट समाप्त की और अब गाइडलाइन दरों में 10 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी।
उन्होंने कहा कि इससे कुल मिलाकर भूमि की सरकारी कीमतें 40 से 130 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा।

“22 लाख की स्टांप ड्यूटी लगाकर सरकार किसे दंडित कर रही?” – नत्थूलाल यादव

पूर्व जिला अध्यक्ष नत्थूलाल यादव ने उदाहरण देते हुए बताया कि 30 लाख की जमीन पर 22 लाख रुपए तक की स्टांप ड्यूटी लगना आम नागरिक के साथ अन्याय है। कई शहरों में स्थिति यह है कि 6 लाख की जमीन खरीदने पर लगभग 4.40 लाख रुपए रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ेगा। कुछ क्षेत्रों में रजिस्ट्री शुल्क जमीन की कीमत बराबर हो जाएगा और कई जगह उससे भी अधिक हो जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले किसानों, गरीबों, मध्यम वर्ग और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों को परेशान करने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं। यादव ने कहा कि कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार रियल एस्टेट क्षेत्र देता है और सरकार के इस निर्णय से इस सेक्टर की “कमर टूट जाएगी”।

“आर्थिक प्रबंधन विफल, जनता पर टैक्सों का बोझ” – राठौर

मुकेश राठौर ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार के समय दी गई 30 प्रतिशत छूट ने रियल एस्टेट सेक्टर में नई ऊर्जा भर दी थी, जिसके कारण कोरोना काल में भी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी रही।
लेकिन वर्तमान सरकार के आर्थिक निर्णय लगातार असंतुलित साबित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास योजनाएं चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, इसलिए लगातार टैक्स बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है।
इसी क्रम में गाइडलाइन दरों के साथ बिजली के दाम भी बढ़ाए गए हैं।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार तत्काल गाइडलाइन दरों में की गई व्यापक वृद्धि को वापस ले और जनता, किसानों, मजदूरों तथा रियल एस्टेट से जुड़े लोगों पर हो रहे आर्थिक दबाव को कम करे।

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