शनिवार, नवम्बर 29, 2025
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संविधान दिवस पर कोरबा में जागरूकता कार्यक्रम: छात्रों को अधिकार, कर्तव्य और लोकतंत्र की बुनियादी समझ

कोरबा (पब्लिक फोरम)। भारत का संविधान दुनिया का सबसे विस्तृत और सशक्त लिखित दस्तावेज माना जाता है। संविधान दिवस के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष शर्मा के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा द्वारा संस्कार भारती हायर सेकंडरी स्कूल, डिंगापुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करना था।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कु. डिंपल ने संविधान की प्रस्तावना, उसके मूल सिद्धांतों तथा नागरिकों से जुड़े अधिकारों और दायित्वों पर सरल और प्रभावी ढंग से जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि संविधान केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि नागरिक जीवन की दिशा निर्धारित करने वाला मार्गदर्शक है।

कु. डिंपल ने लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका— की भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया कि विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका न्याय सुनिश्चित करती है। उनका कहना था कि इन तीनों के समन्वय से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनती है। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि एक जागरूक और सक्रिय नागरिक ही संविधान की वास्तविक शक्ति है। इसलिए युवाओं को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी बराबरी से निभाने की आवश्यकता है।

“संविधान जीवन का मार्गदर्शक” – कु. डिंपल
अपने संदेश में उन्होंने कहा—
“संविधान केवल पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि जीवन में अपनाए जाने वाली दिशा है। इसे व्यवहार में लाना हर नागरिक का कर्तव्य है। यह हमें मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।” साथ ही, उन्होंने छात्र-छात्राओं को मौलिक अधिकारों पर निबंध लेखन हेतु मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

कार्यक्रम में विद्यालय की उप-प्राचार्या हीरामणी निराला ने सचिव कु. डिंपल का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। अंत में प्राचार्या शेख सबीना ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम छात्रों को सशक्त, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में पैरालीगल वालंटियर रमाकांत दुबे, गोपाल चंद्रा तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल के कर्मचारी नागेंद्र का विशेष योगदान रहा।

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