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शनिवार, जनवरी 24, 2026
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SECL दीपका खदान विस्तार: 55 MT उत्पादन से कोरबा में पर्यावरणीय आपदा की आशंका

कोरबा (पब्लिक फोरम)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका ओपन कास्ट कोयला खदान की उत्पादन क्षमता को 40 मिलियन टन से बढ़ाकर 55 मिलियन टन प्रति वर्ष करने के प्रस्तावित विस्तार को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की एक टीम बुधवार को खदान का निरीक्षण करने जा रही है, जिसे विस्तार की मंजूरी से जोड़कर देखा जा रहा है।

वर्तमान उत्पादन से ही गंभीर संकट
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मौजूदा 40 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन से ही क्षेत्र में अभूतपूर्व पर्यावरणीय और सामाजिक संकट पैदा हो चुका है। ऐसे में उत्पादन क्षमता में 15 मिलियन टन की और वृद्धि विनाशकारी साबित हो सकती है।

पूरे क्षेत्र में कोयले की धूल और राख का घनत्व खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में श्वसन संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। भारी विस्फोटों से लगातार कंपन होने के कारण घरों में दरारें आ रही हैं और स्थानीय वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे हैं।

जल संकट और पारिस्थितिकी का विनाश
अत्यधिक खनन के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आसपास के गांवों में भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। नदी-नालों में खदान का दूषित जल मिलने से जलीय जीवन और कृषि भूमि को नुकसान पहुंच रहा है। विस्तार के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ रही है।

कोयला परिवहन के कारण सड़क दुर्घटनाओं में तेजी आई है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। रोजगार, उचित मुआवजा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे विकराल रूप ले चुके हैं।

समिति की मांग: विस्तार तत्काल रोका जाए
ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की टीम से अनुरोध किया है कि वे केवल कागजी कार्रवाई पर भरोसा न करें, बल्कि जमीनी हकीकत और क्षेत्र के निवासियों की पीड़ा पर ध्यान दें।

समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि दीपका खदान विस्तार के लिए हरदीबाजार के अलावा सराईसिंगार, कटगी डबरी और नवापारा गांवों को अधिग्रहित किया जा रहा है। यहीं गेवरा क्षेत्र का विस्तार भी हो रहा है, जिससे आसपास का पूरा इलाका संकटों से घिर जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के समक्ष जीवनयापन की गंभीर चुनौती खड़ी हो जाएगी।

स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह विस्तार बिना उचित विचार-विमर्श और स्थानीय लोगों की सहमति के आगे बढ़ाया गया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी लोकतांत्रिक और कानूनी साधनों का उपयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने प्रस्तावित विस्तार को तत्काल रद्द करने, स्वतंत्र सामाजिक-पर्यावरण ऑडिट कराने, प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और समयबद्ध पुनर्वास पैकेज लागू करने की मांग की है।

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