मंगलवार, जून 25, 2024
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हायर सेकेंडरी के छात्रों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ आई.टी.आई.व्यवसायिक प्रशिक्षण: छत्तीसगढ़ शासन का दूरदर्शी कदम

रायपुर (पब्लिक फोरम)। एससी, एसटी,ओबीसी, माइनॉरिटी संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ के सह संस्थापक/अध्यक्ष मंडल अजय चौहान तथा मुख्य संयोजक एस.के. सोनवानी ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा है कि अब छत्तीसगढ़ के छात्र स्कूल में ही कर सकेंगे आई.टी.आई. का कोर्स। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि पढ़ाई ख़त्म होते ही बच्चों को मिलेगा अंकसूची के साथ प्रमाणपत्र और रोज़गार मिलेगा।

शुक्रवार को प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों के लिए नई व्यवस्था शुरू की गयी है। अब स्कूल में ही आई. टी. आई. जैसे व्यावसायिक तकनीकी पाठयक्रम की पढ़ाई भी होगी। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर इसकी शुरुआत दुर्ग जिले के पाटन में संचालित स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल से कर दी गई है। जल्द ही ये व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में इस नयी सुविधा का आग़ाज़ किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार कर रहे हैं। अब हायर सेकंडेरी में छात्र आई. टी. आई. का पाठ्यक्रम भी कर सकेंगे। बारहवीं पढ़ते हुए आई. टी. आई का सर्टिफ़िकेट कोर्स पूरा होगा, इससे बच्चों का समय बचेगा । बारहवीं पास करते ही उन्हें अंकसूची मिलेगी और आई. टी. आई. का प्रमाणपत्र उनके हाथ में होगा, वो रोज़गार की दिशा में कदम उठा सकेंगे।

पाटन के स्कूल से शुरू हुए इस रोजगारोन्मुखी शिक्षा पाठ्यक्रम को स्कूल शिक्षा विभाग एवं आई. टी. आई. द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। हायर सेकंडेरी के विद्यार्थी अपने स्कूली शिक्षा के साथ साथ पांचवें मुख्य विषय के रूप में व्यावसायिक पाठ्यक्रम का चयन कर सकेंगे। छात्रों के लिए वेल्डर ट्रेड एवं छात्राओं के लिए स्टेनोग्राफ़ी का हिंदी पाठ्यक्रम बनाया गया है। ये पाठ्यक्रम २ साल का होगा। छात्र ११वीं कक्षा से ये पाठ्यक्रम कर सकेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यक्रम में कहा कि विद्यार्थी हायर सेकंडेरी की शिक्षा के साथ व्यावसायिक पाठ्यक्रम का भी प्रशिक्षण हासिल करेंगे, ताकि उन्हें रोज़गार प्राप्त करने में आसानी होगी।

यहां यह उल्लेखनीय है कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के नाम पर एकमात्र मेडिकल कॉलेज, तकनीकी शिक्षा के नाम पर एक इंजीनियरिंग कॉलेज, 3 पॉलिटेक्निक और लगभग 5 आई. टी. आई. हुआ करते थे । राज्य बनने के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऑल्टरनेटिव मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज , इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और आई. टी. आई. शासकीय और निजी क्षेत्र में प्रारंभ किए। जिससे छत्तीसगढ़ में ही डॉक्टर्स, इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ तैयार हो सकें और इन पदों पर भर्ती के लिए दूसरे राज्यों से उम्मीदवार आयात न करना पड़े और छत्तीसगढ़ के बच्चों को अपनी प्रतिभा का लाभ मिल सके। इस नीति को भूपेश सरकार ने और तेजी से विस्तार दिया है । इसी क्रम में भूपेश सरकार ने हाल ही में दुर्ग जिले में संचालित स्व चंदूलाल मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण किया है ।

छत्तीसगढ़ शासन की यह नई नीति, देश के संविधान में दर्शित कल्याणकारी राज्य ( सरकार ) की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक और उल्लेखनीय कदम है।* मुख्यमंत्री ने जन सरोकारों के प्रति सचेत सरकार चलाने का एक और महती उदाहरण पेश किया है, वहीं अध्ययनरत बच्चों के जिम्मेदार अभिभावक की भूमिका भी निभाई है।

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