मंगलवार, जून 25, 2024
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रोजगार की मांग पर भूविस्थापित किसानों का धरना 98 वें दिन भी जारी

08 फरवरी को कुसमुंडा मुख्यालय के सामने करेंगे विशाल आक्रोश सभा

कोयला मंत्री का फूंकेंगे पुतला

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कुसमुंडा क्षेत्र के भू विस्थापित किसान 31अक्टूबर को 12 घंटे कुसमुंडा खदान को पूर्ण रूप से बंद करने के बाद रोजगार की मांग को लेकर एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर रोजगार एकता संघ के बेनर तले बैठे हैं आंदोलन की शुरुआत से ही किसान सभा के कार्यकर्ता हर दिन आंदोलन स्थल पहुंच कर भू विस्थापितों का हौसला बढ़ाने का काम कर रहे हैं भारी ठंड और बरसात में भी लगातार 98 दिनों से रोजगार की मांग को लेकर भू विस्थापित आंदोलनरत है इस बीच तीन बार खदान बंद किया गया और आंदोलन के समय16 प्रदर्शनकारियों को जेल भी भेजा गया लेकिन भू विस्थापित बिना रोजगार मिले आंदोलन से हटने के लिए तैयार नहीं है।

98 वें दिन चल रहे धरना स्थल पहुंच कर आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के चालीस साल बाद भी पुनर्वास का मसला हल नहीं हुआ दरअसल एसईसीएल कुसमुंडा,गेवरा, दीपका,कोरबा परियोजना के लिए अधिग्रहित गांवो के ग्रामीण वर्षों से रोजगार की राह ताक रहे हैं वे कार्यालयों का चक्कर लगाकर थक चुके है अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। भू विस्थापितों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है जो मार्च में विशाल जनांदोलन के रूप में सामने आने वाला है। एसईसीएल को सभी भू विस्थापितों को रोजगार देना होगा नहीं तो खदान को पूर्ण रूप से बंद करने की तैयारी की जा रही है।

रोजगार एकता संघ के राधेश्याम कश्यप, दामोदर, रेशम यादव ने कहा कि सरकार को विस्थापितों को ऐसा जीवन प्रदान करना चाहिए जिससे उनको लगे की उन्होंने अपनी जमीन नहीं खोया है लेकिन सरकार गरीबों की जमीन लेकर गरीबों को जमीन पर लाकर खड़ा कर दी है। आंदोलन रोजगार मिलने तक जारी रहेगा भू विस्थापितों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए धरना प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होने पर 8 फरवरी को कुसमुंडा मुख्यालय के सामने विशाल आक्रोश सभा आयोजित किया गया है और 100 दिन पूरे होने और एसईसीएल द्वारा नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू नहीं करने के खिलाफ कोयला मंत्री का पुतला भी फूंका जायेगा। और फरवरी तक रोजगार देने की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मार्च में खदान बंदी भी की जायेगी।

आज के धरना में प्रमुख रूप से प्रशांत झा,राधेश्याम कश्यप, जवाहर सिंह कंवर, जय कौशिक, दामोदर, रेशम, बलराम, बेदराम, मोहनलाल, अनिल, रविशंकर, पंकज, ओंकार प्रसाद, नरेश, सोहरिक, मोतीलाल आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।

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