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राज्य कर्मचारी का दर्जा मांगा आशा वर्कर्स ने: लखनऊ में किया राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन

लखनऊ (पब्लिक फोरम)। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ( ऐक्टू ) से सम्बद्ध आशा वर्कर्स यूनियन उत्तर प्रदेश ने आशा कर्मियों की विभिन्न मांगों को लेकर जिसमें प्रमुख रुप से कर्मियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए, आशा कर्मियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए जैसे मांगों लेकर लखनऊ के ईको गार्डन में राज्य स्तरीय धरना प्रदर्शन किया।

धरना कार्यक्रम में स्कीम वर्कर्स यूनियन की राष्ट्रीय संयोजक कामरेड शशि यादव ने कहा कि आशा वर्कर्स राष्ट्रीय योजना के रूप में पूरे भारत में अलग-अलग नाम से लागू है। इन आशा कार्यकर्ताओं को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मानदेय भी दिया जाता है। लेकिन देखा जाए तो यह सरकारों द्वारा किया जा रहा श्रम कानून का घोर उल्लंघन है। इसी के खिलाफ हम राष्ट्रीय स्तर पर आन्दोलन चला रहे हैं। शशि यादव ने कहा कि स्कीम वर्कर्स के लिए एक राष्ट्रीय सेवा नियमावली बननी चाहिए। साथ ही केन्द्र सरकार के द्वारा आशा कार्यकर्ताओं का न्यूनतम वेतन भी तय किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजीव डीमरी ने कहा कि मोदी जी की केंद्र की सरकार मानदेयी कर्मचारियों को बिना न्यूनतम वेतन दिये बंधुआ मजदूरों की तरह काम करवा रही है जिसे हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

आशा वर्कर्स यूनियन की नेता अमरजीत कौर ने कहा कि मुख्य मंत्री को अपना मांग पत्र देने का निवेदन करना ही इस राज्य के लिए गुनाह हो गया है। ऐसा करने पर आशा कार्यकर्ताओं की पिटाई के लिए पुरूष पुलिस बल को न केवल उतार दिया जाता है बल्कि वो उनसे हर तरह का अमानवीय व्यवहार करते हैं। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता पूनम पांडेय का गला घोंटकर उन्हें जान से मारने के कोशिश की गयी तथा उनका हाथ तोड़ डाला गया। मामला यहीं नहीं रुकता है। उस आशा कार्यकर्ता के खिलाफ फर्जी मुकदमे भी दर्ज कर दिए गए। भ्रष्टाचार का आलम ये है कि प्रदेश मे आशा कार्यकर्ताओं के काम के पैसे अधिकारी खा जाते हैं तथा उनके खिलाफ बोलने पर उनके ऊपर दमन किया जाता है। हम हर जुल्म और अन्याय का मुकाबला करेंगे।

आशा वर्कर्स यूनियन की नेता गीता मिश्रा ने कहा कि सरकार या तो सुने वरना हमको भी सुनाना आता है। जिस दिन हमारी आशा कार्यकर्ता हैं बहने अपने सेंटरों में बैठ जायेंगी उस दिन सरकार और उसके दुलारे लुटेरों को पता चलेगा की आशा वर्कर्स का क्या महत्व है।

आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य संयोजिका सरोजिनी बिष्ट ने कहा कि 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा, 50 लाख का जीवन बीमा, मातृत्व अवकाश व न्यूनतम वेतन की गारंटी यदि सरकार नहीं करती व हमारी अन्य मांगों को सरकार पूरा नहीं करती तो आन्दोलन को और तेज करेंगे।

धरना प्रदर्शन आंदोलन को उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की प्रदेश संयोजक साधना पांडेय, बाराबंकी आशा वर्कर्स नेता अनीता रावत, अमेठी की नेता ऊषा लोधी, इलाहाबाद की नेता मंजू आदि ने भी सम्बोधित किया। आल इन्डिया सेंट्रल काउन्सिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही, सचिव अनिल वर्मा, उपाध्यक्ष एस एम जैदी, राना प्रताप सिंह, गौरव सिंह, राम सिंह, अमर सिंह व कमल उसरी भी आंदोलन में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनीता मिश्रा तथा संचालन अफरोज आलम ने किया धरना आंदोलन के अंत में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

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