मंगलवार, जून 18, 2024
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फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में हत्या के विरुद्ध उपजे आक्रोश को अंजाम तक पहुंचायें: भाकपा-माले

84 वर्षीय जेश़ूइट सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की कस्टडी में की गई हत्या से उपजे आक्रोश व असीम दुख में झारखण्ड व पूरे भारत की गरीब एवं दमित जनता के साथ है. मोदी—शाह राज के एजेण्ट का काम करते हुए एन.आई.ए. मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले भारत के प्रतिष्ठित व अग्रणी लोगों को ‘भीमा—कोरेगांव केस’ में बर्बर यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज रही है ताकि वे अनिश्चित काल तक विचाराधीन कैदी बने रहें और जेल में ही रहें. फादर स्टेन स्वामी को भी इसी मामले में फंसा कर जेल भेज दिया गया था.

एन.आई.ए. और मोदी—शाह का शासन भलीभांति यह बात जानता है कि भीमा—कोरेगांव मामले में बनाये गये सभी अभियुक्तों के खिलाफ झूठा मुकदमा लगाया गया है और जेल भेजे गये सभी लोग न्यायिक प्रक्रिया के बाद बाइज्जत बरी हो जायेंगे. लेकिन यू.ए.पी.ए. के तहत जेल में भेज कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ‘न्यायिक प्रक्रिया’ खुद ही निर्दोष अभियुक्तों के लिए हिरासत में टॉर्चर, और मृत्युदण्ड तक बन जाये.

फादर स्टेन की जमानत की सुनवाई ने भारतीय न्याय व्यवस्था में गिरावट के नये प्रतिमान दर्ज कर दिये हैं जो आगामी इतिहास में दर्ज रहेगा. यह मामला आपातकाल के दौर में चले एडीएम जबलपुर मामले से भी नीचे का गिना जायेगा जब सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह से विफल हो गया था. न्यायाधीशों ने सुनवाईयों में दो महीनों से अधिक का समय सिर्फ एक सिपर देने की अनुमति देने में काट दिया जिससे फादर स्टेन सम्मानजनक तरीके से पानी पी सकते थे. फादर स्टेन स्वामी चलने फिरने में असमर्थ थे अत: उन्होंने अपील की थी कि साथी बंदियों द्वारा चम्मच से उन्हें भोजन खिलाने की अनुमति दी जाय. लेकिन अदालत ने पूरी संवेदनहीनता दिखाते हुए बुढ़ापे का चिन्ह कह कर खारिज कर इस तथ्य को एक विचाराधीन बंदी की जमानत के लिए पर्याप्त आधार ही नहीं माना. जिन न्यायाधीशों ने फादर स्टेन की जमानत याचिकाओं को खारिज किया था आज उनके हाथ खून से रंगे हुए हैं.

भारत के गृहमंत्री अमित शाह उन जांच एजेन्सियों के सर्वेसर्वा हैं जो कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे लगा कर उन्हें जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में यातनायें झेलने, अनन्तकाल तक पड़े रहने और मरने के लिए भेजती हैं. कितनी क्रूर बिडम्बना है कि वही अमित शाह एक अंग्रेजी पत्र में 21 महीनों के आपातकाल में लोकतंत्र पर हुए हमले पर एक ओप—एड भी लिख देते हैं!

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने कहा है कि फादर स्टेन स्वामी की कस्टोडियल हत्या पर मात्र दुख व शोक व्यक्त करना काफी नहीं हो सकता, यह हमारे गुस्से व प्रतिरोध की सार्थक अभिव्यक्ति की मांग कर रही है. भारत के सर्वाधिक उत्पीड़ित व दमित लोगों के लिए न्याय व सम्मान के संघर्ष को आगे बढ़ाते रहना, भारत में राज कर रहे फासीवादियों के हमलों के खिलाफ पूरी दृढ़ता व साहस से खड़े रहना ही फादर स्टेन स्वामी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

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