मंगलवार, जून 25, 2024
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काला पानी की सजा काट रहे पुनर्वास ग्राम चैनपुर के भूविस्थापित

* दीपका क्षेत्र ने वर्ष 1989 में दिया था बसाहट स्थल अब तक नही मिला सम्पूर्ण सुविधा

* ऊर्जाधानी संगठन ने एसईसीएल अधिकारी के साथ बसाहट ग्राम का किया सर्वेक्षण

कोरबा/दीपका (पब्लिक फोरम)। ऊर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति द्वारा विगत दिनों पुनर्वास ग्रामो में व्याप्त समस्याओ के मद्देनजर आयोजित सम्मेलन में लिए गए निर्णय के अनुसार आज एसईसीएल के दीपका क्षेत्र अंतर्गत पुनर्वास ग्राम चैनपुर का सर्वेक्षण किया गया जिसमें सन्गठन के पदाधिकारियों के साथ एसईसीएल के कार्मिक विभाग के अधिकारी भी सम्मलित थे । एसईसीएल प्रबंधन एवं जिला प्रशासन पुनर्वास नीति के तहत विस्थापितों को आधुनिकतम सुविधाओ से परिपूर्ण बसाहट स्थल मुहैय्या कराने का दावा करती है किंतु पुनर्वास ग्रामो की हालत देखकर इन दावों की पोल खुल जाती है ।

एसईसीएल दीपका क्षेत्र अंतर्गत कोयला उत्खनन हेतु पाली विकासखण्ड के चैनपुर ग्राम का सम्पूर्ण अधिग्रहण वर्ष 1986 में किया गया था जिसमे 1664 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल था जिसमे अभी भी 141 लोंगो का रोजगार के प्रकरण लम्बित है जबकि 45 लोगों ने नामांकन दाखिल कर रोजगार पाने की आस में बूढ़े हो चले हैं । वर्ष 1988-89 में साफ सुथरे इलाके में चैनपुर के विस्थापित हुए परिवारों को पुनर्वास ग्राम में प्राथमिक सुविधाओं के साथ बसाया गया था । तत्कालीन विधायक श्री बोधराम कंवर , प्यारे लाल कंवर एवं हीरा सिंह मरकाम जी की मौजूदगी में जिला प्रशासन के आला अधिकारियों व एसईसीएल के अधिकारियों के साथ समस्त सुविधाएं लागू रखने की शर्त पर यहां के लोंगो ने अपनी नई जीवन की शुरुआत किया था ।

आज की बदली हुई तस्वीर में छोटी छोटी मूलभूत सुविधाओं के लिये लोंगो को तरसना पड़ रहा है । एसईसीएल के उत्खनन क्षेत्र में विस्तार के साथ ही डम्प एरिया , सीआईएसएफ कैम्प ,रातिजा कोल वाशरी ने चैनपुर की निवासियों का चैन लूट लिया है । चारो तरफ से घिर जाने और उड़ने वाली धूल के कारण लोंगो को भारी परेशानी उठाना पड़ रहा है । दीपका कालोनी पहुंच मार्ग को अतिक्रमण कर लिया गया है जिससे 2 किमी के बजाय तिवरता से दीपका पहुंचने के लिए 15 किमी तक का सफर तय करना पड़ रहा है ।

पेयजल संकट के साथ साथ तालाबो में पानी नही रहने से निस्तार की समस्या उत्पन्न हो चुकी है । आंगन बाड़ी , स्कूल भवन , स्वास्थ केंद्र ,ग्रीन हाट (बाजार) जर्जर हो चुके हैं और अब बबूल झाड़ियों का जंगल बन चुका है । खेलकूद और मनोरंजन के लिए कोई मैदान व भवन ही नही है । आंतरिक सड़के उखड़ चुकी है और नाली मिट्टी कचरे से पट चुका है । इस बसाहट स्थल के 85 घरों में लगभग 550 जनसंख्या है युवा बेरोजगार घूम रहे हैं कोई स्वास्थ कार्यकर्ता नही है ।

ऊर्जाधानी सन्गठन के अध्यक्ष श्री सपूरन कुलदीप ने कहा है कि विकास की अवधारणा की असली सच्चाई को देखने के बाद देश हित मे अपनी पूर्वजो की सपनो के ग्राम को कोई क्यो देना चाहेगा । आगे भी हम पुनर्वास ग्रामो में अपनी दौरा और सर्वेक्षण जारी रखेंगे तथा उचित मंच पर भुविस्थापित परिवारों के शोषण के खिलाफ बातों को रखेंगे। निरीक्षण के दौरान सपूरन कुलदीप ,रविन्द्र जगत , ललित महिलांगे, अमरीका सिंह , विजय श्याम , भागीरथी यादव , सहित अन्य शामिल थे तथा ग्राम में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं सहित लोग उपस्थित थे ।

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